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Bihar News: Hajipur News: हाजीपुर में 5.15 करोड़ के बाद भी बस स्टैंड जमीन के इंतजार में, रामाशीष चौक पर टोल-चुंगी की निविदा से उठे सवाल

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Hajipur News | Vaishali News | हाजीपुर के रामाशीष चौक स्थित अस्थायी बस स्टैंड का मामला फिर चर्चा में है। 515.52 लाख रुपये की मंजूरी के बावजूद स्थायी जमीन नहीं मिलने और टोल-चुंगी निविदा पर सवाल उठे हैं।

हाजीपुर, 9 अगस्त। आलम की खबर: हाजीपुर शहर में स्थायी बस स्टैंड की वर्षों पुरानी जरूरत अब एक बार फिर चर्चा में है। बस स्टैंड निर्माण के लिए सरकार की ओर से करीब 5.15 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत किए जाने और जमीन उपलब्ध कराने के लिए विभागीय स्तर पर पत्राचार होने के बावजूद आज तक स्थायी स्थल तय नहीं हो सका है। दूसरी ओर, रामाशीष चौक स्थित एनएचएआई की खाली जमीन पर वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए टोल एवं चुंगी वसूली की निविदा जारी होने के बाद इस जमीन के इस्तेमाल और बस स्टैंड की लंबित योजना को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हाजीपुर नगर परिषद क्षेत्र में लंबे समय से कोई व्यवस्थित स्थायी बस स्टैंड नहीं है। वर्तमान में रामाशीष चौक पुल के नीचे और आसपास उपलब्ध खाली जगह पर बसों का संचालन और ठहराव किया जाता है। इससे यात्रियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं, बसों के अस्थायी ठहराव के कारण व्यस्त रामाशीष चौक की यातायात व्यवस्था पर भी दबाव बना रहता है।

2021 में ही मिल चुकी थी 515.52 लाख की राशि

नगर विकास एवं आवास विभाग ने 10 जून 2021 को नगर परिषद हाजीपुर में बस स्टैंड निर्माण के लिए 515.52 लाख रुपये आवंटित किए थे। इसके बाद जुलाई 2023 में विभाग की ओर से वैशाली के समाहर्ता को पत्र भेजकर बस स्टैंड निर्माण के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।

यानी योजना के लिए राशि उपलब्ध कराने के साथ जमीन की व्यवस्था को लेकर विभागीय प्रक्रिया भी शुरू हुई थी। लेकिन इसके बावजूद अब तक स्थायी जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी।

यहीं से पूरा मामला सवालों के घेरे में आता है। यदि बस स्टैंड के निर्माण के लिए पांच वर्ष पहले राशि स्वीकृत हो गई थी, तो अब तक जमीन चिन्हित कर निर्माण की प्रक्रिया क्यों शुरू नहीं हो सकी? क्या जमीन उपलब्ध कराने में किसी विभागीय समन्वय की कमी रही या फिर किसी अन्य कारण से योजना आगे नहीं बढ़ पाई?

रामाशीष चौक पर अभी भी अस्थायी व्यवस्था

स्थायी बस स्टैंड नहीं होने के कारण रामाशीष चौक पर अस्थायी व्यवस्था के तहत बसों का संचालन हो रहा है। बताया जाता है कि पुल के नीचे एनएचएआई की खाली जमीन का इस्तेमाल बसों के रुकने और यात्रियों के आवागमन के लिए किया जाता है।

इस व्यवस्था में यात्रियों के लिए स्थायी बस स्टैंड जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। नतीजा यह है कि बस पकड़ने वाले यात्रियों को खुले और अस्थायी स्थान पर इंतजार करना पड़ता है।

बस संचालकों के लिए भी यह व्यवस्था लंबे समय के लिए उपयुक्त नहीं मानी जा सकती। एक व्यवस्थित बस स्टैंड होने पर बसों के आने-जाने, यात्रियों के चढ़ने-उतरने और वाहनों के ठहराव को अलग-अलग तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बनी थी अस्थायी व्यवस्था

रामाशीष चौक के बस स्टैंड का मामला न्यायालय तक भी पहुंच चुका है। राजन सिंह बनाम बिहार सरकार मामले में 7 जनवरी 2022 के आदेश के अनुपालन में जिला प्रशासन की ओर से स्थल निरीक्षण किया गया था।

उस समय स्थायी बस स्टैंड के लिए जमीन उपलब्ध होने तक वैकल्पिक व्यवस्था करने की बात सामने आई थी। एनएच-22 के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में निर्माणाधीन सड़क परियोजना से जुड़ी खाली जमीन पर बस स्टैंड स्थानांतरित करने की व्यवस्था पर भी विचार किया गया था।

लेकिन अस्थायी व्यवस्था के बाद स्थायी समाधान की दिशा में मामला अब भी आगे बढ़ने का इंतजार कर रहा है।

विधानसभा में भी सरकार से पूछा गया था सवाल

हाजीपुर के स्थायी बस स्टैंड का मुद्दा बिहार विधानसभा में भी उठ चुका है। विधायक मुकेश कुमार रौशन ने इस विषय को सदन में उठाया था।

सरकार की ओर से दिए गए जवाब में यह स्वीकार किया गया था कि हाजीपुर नगर परिषद क्षेत्र में फिलहाल कोई स्थायी बस स्टैंड नहीं है। रामाशीष चौक पर एनएचएआई की खाली जमीन अथवा फ्लाईओवर के नीचे बसों के रुकने की स्थिति का भी उल्लेख किया गया था।

सरकार ने यह भी बताया था कि जमीन उपलब्ध होने के बाद वहां सुविधायुक्त बस स्टैंड का निर्माण कराया जाएगा।

इस जवाब के बाद भी मूल समस्या जमीन की उपलब्धता पर ही टिकी हुई है।

अब टोल-चुंगी की निविदा से क्यों उठा विवाद?

वैशाली समाहरणालय के पत्रांक-805, दिनांक 20 जुलाई 2026 के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए टोल एवं चुंगी वसूली से संबंधित निविदा जारी की गई है। यह निविदा रामाशीष चौक स्थित एनएचएआई की खाली जमीन से जुड़ी बताई जा रही है।

यही वह बिंदु है जहां स्थायी बस स्टैंड की लंबित योजना और नई निविदा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

विरोध करने वालों का कहना है कि जब रामाशीष चौक क्षेत्र में वर्षों से बस स्टैंड के लिए स्थायी जमीन की जरूरत बनी हुई है और बसों का संचालन फिलहाल इसी इलाके की खाली जमीन में हो रहा है, तब वहां किसी अन्य उपयोग के लिए निविदा निकालने से पहले जमीन के भविष्य के इस्तेमाल की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

साथ ही यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि यदि जमीन एनएचएआई की है, तो उस पर टोल एवं चुंगी वसूली की व्यवस्था किस आधार पर की जा रही है और संबंधित एजेंसियों के बीच इसकी अनुमति एवं उपयोग को लेकर क्या प्रक्रिया अपनाई गई है।

हालांकि, इस निविदा को अवैध ठहराने से पहले संबंधित दस्तावेजों और जमीन के स्वामित्व व उपयोग की अनुमति की आधिकारिक जांच जरूरी होगी।

यात्रियों की परेशानी का स्थायी समाधान कब?

हाजीपुर शहर में बसों के लिए स्थायी स्थान उपलब्ध नहीं होने का असर सीधे आम यात्रियों पर पड़ता है। बस स्टैंड केवल बसों के खड़े होने की जगह नहीं होता, बल्कि वहां यात्रियों के लिए प्रतीक्षालय, पेयजल, शौचालय, टिकट व्यवस्था, पार्किंग और सुरक्षा जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा सकती हैं।

रामाशीष चौक जैसे व्यस्त क्षेत्र में स्थायी और व्यवस्थित बस स्टैंड होने से शहर की यातायात व्यवस्था को भी राहत मिल सकती है। बसों का ठहराव निर्धारित स्थान पर होने से सड़क पर अनावश्यक दबाव कम किया जा सकता है।

लेकिन वर्तमान स्थिति में वर्षों पुरानी योजना जमीन की कमी के कारण अटकी हुई है।

सबसे बड़ा सवाल: पांच साल बाद भी जमीन क्यों नहीं?

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब 2021 में 515.52 लाख रुपये आवंटित कर दिए गए थे और 2023 में जमीन उपलब्ध कराने के लिए विभागीय पत्र भी भेजा गया था, तो 2026 तक स्थायी जमीन क्यों नहीं मिल सकी?

अगर जमीन उपलब्ध नहीं है तो प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन-किन स्थानों पर जमीन की तलाश की गई, क्या विकल्प सामने आए और अब तक कौन-सी बाधा बनी हुई है।

इसके साथ ही रामाशीष चौक की जमीन पर जारी टोल एवं चुंगी की निविदा को लेकर भी स्थिति साफ किए जाने की जरूरत है। लोगों को यह जानने का अधिकार है कि इस जमीन का वर्तमान और भविष्य का उपयोग क्या प्रस्तावित है तथा इसका स्थायी बस स्टैंड की योजना से कोई टकराव है या नहीं।

फिलहाल स्थायी बस स्टैंड का इंतजार जारी है। 515.52 लाख रुपये की राशि, विभागीय पत्राचार, न्यायालय में उठा मामला और विधानसभा में सरकार का जवाब—इन सबके बावजूद हाजीपुर के यात्रियों को अभी भी अस्थायी व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

अब जरूरत सिर्फ एक और पत्र जारी करने की नहीं, बल्कि जमीन तय करने, योजना को आगे बढ़ाने और निर्माण की समयसीमा तय करने की है।

जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन का पक्ष मिलने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।

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हाजीपुर को बस स्टैंड चाहिए, सिर्फ कागजों पर योजना नहीं

हाजीपुर जैसे महत्वपूर्ण शहर में स्थायी बस स्टैंड का अभाव केवल यात्री सुविधा की समस्या नहीं है। यह शहर की यातायात व्यवस्था और सुनियोजित विकास से भी जुड़ा हुआ विषय है।

पांच वर्ष पहले राशि स्वीकृत होने के बाद भी यदि जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी, तो यह सवाल स्वाभाविक है कि सरकारी योजनाओं में बजट और जमीन के बीच तालमेल क्यों नहीं बनाया जाता। किसी परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ धनराशि उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। जमीन, विभागीय समन्वय और स्पष्ट समयसीमा भी उतनी ही जरूरी है।

रामाशीष चौक पर अस्थायी रूप से बसों का संचालन लोगों की तत्काल जरूरत तो पूरी कर सकता है, लेकिन इसे स्थायी व्यवस्था नहीं माना जा सकता। यात्रियों को बारिश, गर्मी और भीड़ के बीच खुले स्थान पर बसों का इंतजार करना पड़ता है। वहीं बसों के ठहराव का असर यातायात पर भी पड़ता है।

ऐसे में प्रशासन को अब इस मामले में स्पष्ट रोडमैप सामने रखना चाहिए। कौन-सी जमीन बस स्टैंड के लिए प्रस्तावित है, जमीन कब तक उपलब्ध होगी और निर्माण कब शुरू होगा—इन सवालों का जवाब समयबद्ध तरीके से मिलना चाहिए।

रामाशीष चौक की जमीन से जुड़ी टोल-चुंगी निविदा पर उठे सवालों का भी पारदर्शी तरीके से जवाब दिया जाना जरूरी है। यदि प्रक्रिया नियमों के तहत है तो उसकी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि भविष्य में उसी क्षेत्र में बस स्टैंड की योजना है तो दोनों विषयों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना चाहिए।

हाजीपुर अब सिर्फ स्वीकृति नहीं, स्थायी बस स्टैंड के निर्माण की तारीख जानना चाहता है।

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